महामाया का स्मरण करना , सत्य बोलना , उतम सलाह देना , प्रजा हितेषी कर्म चारणों का कार्य व पहचान हे !
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Thursday, January 8, 2009
30. श्री तेमड़े राय मन्दिर
श्री तेमड़े राय मन्दिर : यह स्थान जैसलमेर शहर से २५ की. मी. दक्षिण की तरफ़ बना हुवा हें! इस स्थान को दूसरा हिंगलाज स्थान के नाम से जाना जाता हें ! इस पर्वत पर तेमड़ा नामक विशालकाय हुण जाति का असुर रहता था ! जिसको मातेश्वरी ने उक्त पर्वत की गुफा मे गाढ दिया था उसके ऊपर एक भयंकर पत्थर रख दिया था जो आज भी वहा मोजूद हें ! यहाँ मातेश्वरी ने काफी समय निवास किया ! मैया का परिवार कुछ समय इस माड़ प्रदेश मे रहा फ़िर वापिस कच्छ प्रान्त अपने वतन को चले गए ! मातेश्वरी ने सन ९९९ को सातों बहनों सहित हिंगलाज धाम को गमन किया ! तब तत्कालीन शाशक श्री देवराज ने इस पर्वत पर मन्दिर बनाया ! यहाँ मेलार्थी आने लगे ! मैया के प्रति भक्तो की आस्था मे बढोतरी हो गई ! वर्त्तमान मे हजारो आदमी पैदल व अपने साधनों से प्रति वर्ष मैया के आलोलिक रूप का दर्शन करते हें ! मैया सब की पुकार सुनती हें अभी कुछ सालो पहले किसी ने चार भुजा धरी शेरो वाली मैया की मूर्ति स्थापित कर दी मैया की प्रत्येक मूर्ति सात रूपों मे हें ! मैया सबकी रक्षा करे !!!!
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