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Thursday, January 8, 2009

29. देवल माता

देवल माता का जन्म सवंत १४४४ माघ शुद्धी चौदस के दिन बताया गया हे ! देवल माता हिंगलाज माताजी की सर्वकला युक्त अवतार थी ! देवल माता ने भक्त भलियाजी और भूपतजी दोनों पर करुणा कर के एक के घर पुत्री और दुसरे के घर पुत्र वधु बनकर दोनों वंश उज्जवल किए ! इनका जन्म माडवा ग्राम भलियेजी सिन्ढायच के यहाँ हुवा था ! इनका ससुराल खारोडा ग्राम और पति बापन जी देथा थे ! मैया ने भक्तो के हितार्थ गृहस्ती धर्म पालन किया देविदास , मेपा, खींडा आदि देथा शाखा के चारण मैया के पुत्र थे ! बूट , बेचरा , बलाल, खेतु, बजरी , मानसरी यह छ: पुत्रिया थी !

एक बार जैसलमेर राजा गड़सी को भयंकर रोग हो गया था , इनकी पीड़ा मिटाने के लिए मैया खारोडो से माड़ प्रदेश होकर पधारी थी ! उस समय माड़ प्रदेश मे पानी की विकट समस्या थी ! मैया ने अपने तपोबल से सुमलियाई आदि ग्राम मे दस फ़ुट जमीन खोदन पर अथाह स्वच्छ जल होने का वरदान दिया था ! ऐसे अनेक चमत्कार बताते हुवे मैया ने गड़सी राजा को असाध्य रोग से छुटकारा दिलाया , तब राजा ने प्रसन्न होकर अनेक ग्राम ३६ लोक बगसिस करने का मातेश्वरी से निवेदन किया , तब मातेश्वरी ने सिर्फ़ ३६ लोक भक्त ही स्वीकार किए ! और राजा से प्रजा हित मे गड़ीसर नामक तालाब बनाकर उसमे हिंगलाज मैया का मन्दिर बनाने का आदेश दिया ! अभी वर्तमान मे जो गड़ीसर तालाब के अन्दर जो हिंगलाज मन्दिर बना हुवा हे , वो देवलजी का ही बनाया हुवा हे ! क्योकि वो मन्दिर हिंगलाज के नाम से ही बना हुवा था ! देवल मैया ख़ुद हिंगलाज की साक्षात् अवतार थी !

महामाया का स्मरण करना , सत्य बोलना , उतम सलाह देना , प्रजा हितेषी कर्म चारणों का कार्य पहचान हे !

देवल माता का देवलोक गमन सवंत १५८५ आषाढ़ सूद चौदस बताया गया हे ! १४१ वर्षो तक देवल माता मृत्यु लोक मे विराजमान रही ! श्री करनी माता आपसे चार माह उम्र मे बड़ी थी !